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Untitled
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Artist:TechnicalVibration9968
Duration:5:15
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बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के मची रे होरी रे, खेलां ला होरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के अंतरा 1: के मण लाल गुलाल उड़त है, के मण लाल गुलाल उड़त है मण केसर कस्तूरी, बाबा श्याम के मण केसर कस्तूरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के अंतरा 2: सौ मण लाल गुलाल उड़त है, सौ मण लाल गुलाल उड़त है द मण केसर कस्तूरी, बाबा श्याम के द मण केसर कस्तूरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के अंतरा 3: कितरे बरस को कुंवर कन्हैया रे, कितरे बरस को कुंवर कन्हैया रे कितरे बरस की राधा गोरी, बाबा श्याम के कितरे बरस की राधा गोरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के अंतरा 4: आठ बरस को कुंवर कन्हैया रे, आठ बरस को कुंवर कन्हैया रे सोलह बरस की राधा गोरी, बाबा श्याम के सोलह बरस की राधा गोरी, बाबा श्याम के बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी, बाबा श्याम के विशेषता: यह एक पारंपरिक राजस्थानी होली धमाल गीत है। इसमें भगवान कृष्ण (कन्हैया) और राधा जी के बीच होली के प्रेम और खाटू श्याम जी के दरबार में उड़ते गुलाल का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। क्या आप इस गीत का अर्थ समझना चाहेंगे या किसी और भजन के बोल ढूँढ रहे हैं?
